रांची: खेल के मैदान में अपने प्रदर्शन से झारखंड का नाम रोशन करने वाली महिला खिलाड़ी सुनीता उरांव आज आर्थिक मजबूरियों के बीच जीवन गुजार रही हैं। कभी प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाली सुनीता वर्तमान में रांची स्थित खेल निदेशालय में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रही हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें इस काम के लिए करीब 10 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।
सुनीता ने थ्रोबॉल और वॉलीबॉल जैसी खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई पदक अपने नाम किए हैं इनमें उनके खाते में दो स्वर्ण पदक भी शामिल बताए जाते हैं खेलों में उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद उन्हें अब तक ऐसी स्थायी नौकरी नहीं मिल सकी, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
पदक जीतने के बाद भी नहीं बदली जिंदगी
सुनीता उरांव की कहानी उन खिलाड़ियों की मुश्किलों को सामने लाती है, जो खेल के क्षेत्र में राज्य के लिए उपलब्धियां हासिल करते हैं, लेकिन प्रतियोगिताओं के बाद आर्थिक और रोजगार संबंधी परेशानियों से जूझते रहते हैं आज रोजी-रोटी चलाने के लिए उन्हें खेल निदेशालय में सफाई का काम करना पड़ रहा है। उनकी स्थिति यह सवाल भी खड़ा करती है कि राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को खेल के बाद स्थायी रोजगार और बेहतर आर्थिक सहायता किस तरह उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री से स्थायी नौकरी की मांग
अपनी आर्थिक स्थिति और रोजगार की समस्या को देखते हुए सुनीता उरांव ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से स्थायी नौकरी देने की अपील की है। उनका कहना है कि खेलों में राज्य का प्रतिनिधित्व करने और पदक हासिल करने के बाद उन्हें ऐसी नौकरी मिलनी चाहिए, जिससे वह सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन चला सकें।
सुनीता की मांग सामने आने के बाद एक बार फिर खिलाड़ियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं, रोजगार और खेल प्रतिभाओं के लिए दीर्घकालिक सहायता पर चर्चा शुरू हो गई है।
खिलाड़ियों के भविष्य पर उठ रहे सवाल

सुनीता उरांव का मामला सिर्फ एक खिलाड़ी की नौकरी की समस्या नहीं है, बल्कि यह उन खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल भी उठाता है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य और देश के लिए पदक हासिल करते हैं।
खेलों में जीत के समय खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना होती है, लेकिन प्रतियोगिताओं के बाद उनके रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी कौन उठाएगा यह सवाल अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
नोट: इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर समाचार को नए और मौलिक शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। किसी आधिकारिक सरकारी घोषणा या दस्तावेज के बिना नौकरी/पदक से जुड़े दावों को अंतिम सरकारी पुष्टि के रूप में नहीं माना जाना चाहिए
